Atique Ahmed biography in hindi। Atiq Ahmad Biography | अतीक अहमद जीवनी। Kon hai Atique Ahmad? Atique Ahmad history. Atique Ahmad story!
Atique Ahmed biography in hindi। Atiq Ahmad Biography | अतीक अहमद जीवन-परिचय, Kon hai Atique Ahmad? Atique Ahmad history. Atique Ahmad story!
कैसे अतीक अहमद बन गया था यूपी की राजनीति का बाहुबली, योगी ने खत्म कर दिया वर्चस्व
Atiq Ahmed: तांगे वाले का अनपढ़ बेटा कैसे बना नंबर वन डॉन? जानें अतीक अहमद के गुनाह औरसियासत की दुनिया से जुड़ी हर कहानी
अतीक अहमद के बारे में आज के इस लेख में जानेंगे सारा कुछ details में!
अतीक अहमद का अतीत: कभी पूरा पूर्वांचल कांपता था जिसके नाम से, आज दिनांक 28-03-2023 की तारीख़ को वो अतीक अहमद रो रहाँ हैं!
Atiq Ahmed Story: उमेश पाल हत्याकांड में नाम आने के बाद से अतीक अहमद को खुद के एनकाउंटर का डर सता रहा था पर ऐसातो नहीं हुआ पर Atique Ahmad को उम्र कैद की सजा हो गई. जब कोर्ट में Atique Ahmad को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई उसवक़्त वो रोने लगा था.एक तांगे वाले के बेटे से लेकर माफिया बनने तक अतीक के गुनाहों की कहानी बहुत लम्बी है।
Atiq Ahmed Biography: प्रयागराज के चर्चित उमेश पाल शूटआउट केस में नामजद होने के बाद माफ़िया अतीक अहमद एकबार फिर सुर्ख़ियों में है. अपने गुनाह की डायरी में सबसे सनसनीखेज वारदात की स्क्रिप्ट लिखने के चलते एक तरफ उसे पुलिसएनकाउंटर में मारे जाने का डर सता रहा था तो वहीं दूसरी तरफ सियासी रसूख के चलते विपक्षी पार्टियों के तमाम दिग्गज नेता उसकेखिलाफ हो रहे कानूनी एक्शन के सामने दीवार बनकर माफिया का बचाव करते नज़र आ रहे हैं।
अतीक के गुनाहों की लिस्ट जितनी लम्बी है, उससे कतई कम उसकी सियासी उपलब्धियां नहीं है. वह माफिया है, गैंग लीडर है, हिस्ट्रीशीटर है, बाहुबली है, दबंग है तो साथ ही आतंक का दूसरा नाम भी है, लेकिन इन सबके बावजूद पांच बार विधायक और एक बारउस फूलपुर सीट से सांसद भी रहा है, और इस बात को सभी लोग जानते हैं,जहां से कभी देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लालनेहरू लोकसभा का चुनाव लड़ते थे. डर-आतंक और दबंगई के बावजूद अतीक के ख़िलाफ़ सौ से ज़्यादा आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं, लेकिन ज़्यादातर मामलों में सिस्टम उसके इशारे पर कुछ इस तरह नाचता था कि आज तक उसे एक भी मामले में सज़ा नहीं हो पाई थी. अतीक की हनक और भौकाल का अंदाजा ऐसे भी लगाया जा सकता है कि हाईकोर्ट के दस जजों ने उसके मुकदमों की सुनवाई से खुदको अलग कर लिया था।
Atiq Ahmad Biography
नाम - अतीक अहमद
जन्म - 10 अगस्त 1962 (उम्र 60) इलाहाबाद , उत्तर प्रदेश , भारत
अन्य राजनीतिक जुडाव - समाजवादी पार्टी (1993 से 1999 तक और 2003 से 2018 तक) अपना दल (1999 से 2003 तक)
जीवनसाथी - शाइस्ता प्रवीण
रिश्ते - खालिद अज़ीम अशरफ (भाई)
बच्चे - 5 बेटे
माता पिता - हाजी फिरोज अहमद (पिता)
निवास - चकिया , इलाहाबाद
पेशा - राजनेता, ठेकेदार, बिल्डर, संपत्ति डीलर और कृषि।
माफिया अतीक अहमद का आतंक
उमेश पाल शूटआउट केस के बाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में टिप्पणी करते हुए लिखा है कि ऐसा लगता है कि प्रयागराज के कुछइलाकों में अब भी क़ानून का नहीं बल्कि अतीक का राज चलता है. इन इलाकों में खाकी का नहीं बल्कि अतीक का इक़बाल बोलता है. चार साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख़ टिप्पणियों के साथ उसे यूपी से बाहर की जेल में रखे जाने का आदेश दिया था. अतीक के बारे मेंकहा जाता है कि वह इतना शातिर और खूंखार है कि अपराध से लेकर कारोबार और दबंगई से लेकर सियासत तक में जो भी उसकेरास्ते आया, उसका अंजाम चांद बाबा से लेकर उमेश पाल तक एक जैसा ही हुआ. योगी राज में भी जेल में रहते हुए वह अपहरणकराकर अगवा हुए शिकार को कैदखाने में बुलाकर उनकी पिटाई करता था।
तांगे वाले के बेटा बना अपराध जगत का बादशाह
एक तांगे वाले का अनपढ़ बेटा अतीक इतना महत्वाकांक्षी है कि पैसों की खातिर जुर्म की दुनिया में कदम रखने के बाद वह कुछ ही दिनोंमें अपराध जगत का बेताज बादशाह बन गया था. अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए उसने सियासत को कवच के तौर पर इस्तेमालकिया करता था और अपराध व राजनीति के दम पर करोड़ों नहीं बल्कि अरबों का आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर लिया. अतीक को गुनाहोंकी दुनिया इतनी पसंद आ गई थी कि उसने अपने पूरे परिवार को इसमें शामिल कर लिया था. वह खुद गुजरात की साबरमती जेल मेंबंद था तो छोटा भाई अशरफ यूपी की बरेली जेल में बंद था बड़ा बेटा उमर लखनऊ जेल में कैद है तो दूसरा बेटा अली अहमद प्रयागराजकी नैनी सेंट्रल जेल में. तीसरे बेटे असद पर उमेश पाल शूटआउट केस में ढाई लाख रुपये का इनाम घोषित है तो पत्नी शाइस्ता परवीनफरार हैं. एहजम और आबान नाम के दो नाबालिग बेटे बाल संरक्षण गृह में हैं।
अब बात करते हैं माफिया अतीक के अतीत की. एक वह दौर था जब अपराधी सियासत की शतरंजी बिसात पर मोहरे की तरहइस्तेमाल होते थे. वह नेताओं के लिए जान लेने व देने में कतई नहीं हिचकते थे, लेकिन 90 के दशक की शुरुआत से पहले क्षेत्रीयपार्टियों की आसमान छूती महत्वाकांक्षाओं ने अपराधियों को ही सत्ता में भागीदार बना दिया. जो क्रिमिनल एनकाउंटर से बचने व दूसरेफायदों के लिए सत्ताधारी नेताओं की परिक्रमा करते नहीं थकते थे, वह खुद जनता के मुख्तार बनने लगे. क्रिमिनल्स के सफेदपोश बननेऔर अपराध के राजनीतिकरण के बदलाव वाले उस दौर में सबसे चर्चित नाम प्रयागराज के अतीक अहमद का है।
करीब 58 साल के अतीक अहमद के पिता हाजी फ़िरोज़ भी आपराधिक प्रवृत्ति के थे. वो तांगा चलाते थे. बेहद मामूली घर के हाजीफ़िरोज़ की माली हालत ऐसी नहीं थी कि वह अतीक समेत अपनी दूसरी औलादों को बेहतर तालीम दिला सकते. पिता के नक़्शे कदमपर चलने की वजह से अतीक के खिलाफ सन 1983 में जो पहली एफआईआर दर्ज हुई. उस वक्त उसकी उम्र महज़ अठारह साल थी. कुछ ही सालों में अतीक के गुनाहों की तूती बोलने लगी, तो वह जिले की क़ानून व्यवस्था के लिए खतरा बनने लगा. अतीक और पुलिसमें लुकाछिपी का खेल आम हो गया था. एक वक़्त ऐसा भी आया जब अतीक और उसके करीबियों पर पुलिस इनकाउंटर में मारे जानेका खतरा मंडराने लगा था।
अतीक अहमद का राजनीतिक करियर
पुलिस इनकाउंटर से बचने के लिए अतीक ने साम्प्रदायिक कार्ड खेला और 1989 में हुए यूपी के विधानसभा चुनावों में इलाहाबाद वेस्टसीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर किस्मत आजमाई. उस दौर के हालात के चलते अतीक को चुनाव में कामयाबी भी मिल गई औरवह माननीय विधायक बन गया. 1989 के इस चुनाव में तत्कालीन पार्षद और अतीक जैसी ही आपराधिक छवि का चांद बाबा भीमैदान में उतरा था. अतीक को यह बात इतनी नागवार गुजरी थी कि वोटिंग के बाद नतीजे आने से पहले ही उसने रोशन बाग़ इलाके केकबाब पराठे की दुकान पर उसे अपने गुर्गों के साथ मिलकर गोली और बमों से मौत के घाट उतार दिया था।
इसके बाद वह इसी इलाहाबाद सिटी वेस्ट सीट से 1991, 1993, 1996 और 2002 में भी लगातार जीत हासिल करता रहा. पहला दोचुनाव वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीता. तीसरे चुनाव में भी वह आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर ही मैदान में उतरा, लेकिनसपा-बसपा गठबंधन ने उसे अपना समर्थन दिया और उसके खिलाफ कोई प्रत्याशी नहीं खड़ा किया. 1996 में वह समाजवादी पार्टी केटिकट पर विधायक चुना गया तो 2002 में डा० सोनेलाल पटेल के अपना दल से. 2002 के चुनाव के वक़्त वह अपना दल का प्रदेशअध्यक्ष बना था और हेलीकाप्टर से यूपी में कई जगहों पर प्रचार के लिए गया था. उसने अपने साथ अपना दल के दो और उम्मीदवारोंको जीत दिलाई थी. साल 2004 में फिर से सपा में न सिर्फ उसकी वापसी हुई, बल्कि वह मुलायम सिंह की पार्टी से उस फूलपुर सेसांसद चुना गया, जो कभी देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की सीट हुआ करती थी. 2004 में सांसद चुने जाने तकअतीक ने जिस भी चुनाव में किस्मत आजमाई, उसे हर जगह कामयाबी मिली थी।
राजूपाल हत्याकांड के बाद शुरू हुआ पतन
25 जनवरी साल 2005 को प्रयागराज में एक ऐसी घटना घटी, जो न सिर्फ इतिहास बन गई, बल्कि उसने अतीक और उसके परिवारके सियासी करियर को तबाह करके रख दिया था. इस घटना के बाद भी अतीक ने लोकसभा और विधानसभा के कई चुनाव लड़े, लेकिन हरेक चुनाव में नाकामी ही उसके हिस्से आई. दरअसल सांसद बनने के बाद अतीक को विधानसभा की सदस्यता छोड़नी पडीथी. अतीक ने अपने इस्तीफे से खाली हुई सीट पर अपने छोटे भाई खालिद अजीम उर्फ़ अशरफ को सपा का टिकट दिलवा दिया. अशरफ के मुकाबले बीएसपी ने क्रिमिनल राजू पाल को टिकट दिया. दो बाहुबलियों की लड़ाई में अशरफ चुनाव हार गया और राजूपाल विधायक चुन लिया गया. विधायक बनते ही राजू पाल पर कई बार जानलेवा हमले हुए थे।
25 जनवरी 2005 को शहर के धूमनगंज इलाके में विधायक राजू पाल की दिन दहाड़े हत्या कर दी गईं. विधायक की हत्या का आरोपअतीक और अशरफ पर लगा था. इस मामले में दोनों भाइयों को जेल भी जाना पड़ा. राजूपाल की हत्या के बाद सिटी वेस्ट सीट परदूसरा उपचुनाव हुआ. तत्कालीन मुलायम सरकार ने इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया और सरकारी मशीनरी की मदद से अशरफविधायक चुन लिया गया. इसी सीट से साल 2007 के चुनाव में अशरफ और 2012 में अतीक को हार का सामना करना पड़ा. राजूपाल की हत्या का आरोप अतीक के गले की ऐसी फांस बनी, जिससे वह आज तक नहीं उबर सका और वह उसके लिए नासूर बन चुकाहै और अब मिट्टी में मिलने की कगार पर पहुंच गया है. दोस्तों लेख को पूरा पड़े आपको बहुत कुछ सीखने और जानने को मिलेगा!
अतीक ने साल 2009 के लोकसभा चुनाव में प्रतापगढ़ से अपना दल के टिकट, 2014 में श्रावस्ती सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट, 2018 में फूलपुर सीट के उपचुनाव में आज़ाद और 2019 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर वाराणसी सीट से पीएम मोदी के खिलाफलोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन सभी जगह उसे करारी हार का सामना करना पड़ा. श्रावस्ती को छोड़कर लोकसभा के बाकी तीनचुनावों में तो उसकी जमानत तक जब्त हो गई।
अतीक अहमद ने खड़ा किया अरबों का साम्राज्य
ऐसा नहीं है कि सफेदपोश बनने के बाद अतीक ने काली करतूतों से तौबा कर ली हो, बल्कि यह कहा जा सकता है कि वक़्त के साथउसके अपराधों की संख्या बढ़ती चली गई. उसने सियासत को ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया और हत्या-जानलेवा हमले, डकैती औरअपहरण जैसी वारदातों को अंजाम देता रहा. सियासत में स्थापित होने के बाद उसने संगठित अपराधों पर ज़्यादा फोकस किया औरआपराधिक घटनाओं के बजाय अपना आर्थिक साम्राज्य मजबूत करने में लग गया. तमाम बेनामी सम्पत्तियां बनाईं. करीबियों के नाम परकरोड़ों-अरबों के ठेके लिए और बाद में कमीशन लेकर उन्हें दूसरों को दे दिया. देश के तकरीबन एक दर्जन राज्यों में अतीक का कारोबारफैला हुआ है. उसकी नामी और बेनामी सम्पत्तियां हैं।रियल स्टेट के रेलवे के स्क्रैप के कारोबार के अलावा उसकी आमदनी का सबसेबड़ा जरिया अरबों-खरबों के ठेके लेने का है. ठेके के कई काम वह अपने लोगों से कराता है तो साथ ही तमाम ठेके कुछ कमीशन लेकरदूसरों को ट्रांसफर कर देता है. रंगदारी-वसूली और गुंडा टैक्स से भी उसने अरबों रुपये कमाए हैं।
1995 में लखनऊ के चर्चित स्टेट गेस्ट हाउस कांड में भी अतीक का नाम उछला था. अतीक ने सफेदपोश बनने का किस तरह दुरूपयोगकिया, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसके खिलाफ नब्बे फीसदी से ज़्यादा मुक़दमे जनप्रतिनिधि बनने के बाद हीदर्ज हुए. कभी महंगी गाड़ियों के काफिले तो कभी घोड़े पर सवार होकर असलहाधारियों की फ़ौज के साथ जब वह सड़कों पर चलताथा तो फिल्मों के डॉन सरीखा नज़र आता था. संगठित अपराधों को अंजाम देने और खुद को आर्थिक तौर पर मजबूत करने की वजह सेउसे माफिया कहा जाने लगा. दोस्तों आगे और भी पड़े अभी बहुत कुछ हैं Atique Ahmad के बारे में जानने को।
अतीक अहमद के गुनाहों का बहीखाता
अतीक अहमद इंटर स्टेट गैंग का संचालक है. उसके गैंग का नंबर आईएस -227 है. उसके गैंग में 121 एक्टिव मेंबर हैं. गैंग के पासअसलहों का जखीरा है. प्रयागराज पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट भी खोल रखी है. शहर के खुल्दाबाद थाने में उसकी हिस्ट्रीशीट का नंबर53 A है. अतीक के खिलाफ अब तक करीब ढाई सौ मुक़दमे दर्ज हो चुके हैं. इनमें मायावती राज में एक ही दिन में दर्ज किये गए सौ सेज़्यादा वह मुक़दमे भी शामिल हैं, जिन्हे हाईकोर्ट के आदेश पर बाद में स्पंज कर दिया गया था. उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमोंकी संख्या अब बढ़कर 101 हो गई है. बड़ी संख्या में उसके मुक़दमे वापस लिए जा चुके हैं, जबकि सबूतों और गवाहों के अभाव में तमाममुकदमों में वह बरी हो चुका है. अभी तक उसे किसी भी मुक़दमे में सज़ा नहीं मिल सकी है. मौजूदा समय में भी उसके खिलाफ अट्ठावनमुक़दमे एक्टिव हैं. इनमें से पचास के करीब मुक़दमे कोर्ट में पेंडिंग हैं, जबकि बाकी मामलों में अभी जांच पूरी नहीं हो सकी है।
अतीक अहमद को माफिया- बाहुबली और डॉन यूं ही नहीं कहा जाता. सख्त सरकार और जेल में रहने के बाद भी उसके जुर्म का सिक्काचलता रहता था. वह जेल की सलाखों के पीछे से भी अपनी सलतनत चलाने में माहिर है. देवरिया जेल में कैद रहते हुए उसने न सिर्फलखनऊ के एक कारोबारी का अपहरण कर उसे जेल बुलवाया, बल्कि वहां उसकी पिटाई कर उसका वीडियो भी सिर्फ इसलिए वायरलकिया ताकि बाहर उसके नाम की दहशत बनी रहे. इसी तरह उसने प्रयागराज के एक कारोबारी का भी अपहरण कराकर उसे जेलबुलवाया और खुद उसकी पिटाई भी की थी।
उमेश पाल शूट आउट केस में वारदात को अंजाम देने वाले एक भी शूटर ने चेहरे पर नकाब नहीं लगा रखा था. अतीक के बेटे असद ने भीपहचान छिपाने की कोई कोशिश नहीं की थी. शूट आउट को फ़िल्मी अंदाज़ में बेख़ौफ़ तरीके से सिर्फ इसीलिए अंजाम दिया गया ताकिअतीक और उसके गैंग का टेरर फिर से कायम हो सके. प्रयागराज की शूटआउट यूनिवर्सिटी में गुर्गों के साथ घुसकर वहां के टीचर्स कोसरेआम पिटाई किये जाने के मामले में फरवरी 2017 से वह जेल में है. लखनऊ के कारोबारी मोहित अपहरण कांड में सुप्रीम कोर्ट केआदेश पर वह पिछले करीब चार साल से गुजरात की अहमदाबाद जेल में है. सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तल्ख़ टिप्पणियों के साथ उसे यूपी सेबाहर किसी दूसरे राज्य की जेल में ट्रांसफर किये जाने के आदेश दिए थे. इलाहाबाद हाईकोर्ट अतीक के साथ ही उसके परिवार वालोंके मुकदमों की सुनवाई करते हुए तमाम चौंकाने वाली टिप्पणियां कर चुका है. हाईकोर्ट के दस जज तो अतीक से जुड़े मुकदमों कीसुनवाई से खुद को अलग भी कर चुके हैं।
अतीक के परिवार पर कानूनी शिकंजा
अतीक का छोटा भाई पूर्व सपा विधायक अशरफ इन दिनों यूपी की बरेली जेल में बंद है. जुलाई 2020 में वह गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के वक़्त उसके खिलाफ 33 मुक़दमे दर्ज थे. ढाई सालों में जेल में रहते हुए उस पर 19 और आपराधिक केस दर्ज हुए हैं और मुकदमों की संख्या अब बढ़कर 52 हो गई है. अशरफ पर कई सालों तक एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। दो नाबालिग छोटे बेटोंको छोड़कर अतीक के बाकी तीनों बेटों के खिलाफ भी क्रिमिनल केस दर्ज हैं. सबसे बड़ा बेटा उमर लखनऊ तो दूसरे नंबर का अलीअहमद प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में कैद है. सीबीआई द्वारा दो लाख रुपये का इनाम घोषित किये जाने के बाद बड़े बेटे उमर नेलखनऊ में सरेंडर किया था. दूसरे नंबर के बेटे अली ने पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में पिछले साल जुलाई महीने मेंप्रयागराज कोर्ट में सरेंडर किया था. तीसरा बेटा असद उमेश पाल शूट आउट केस में मोस्ट वांटेड है और उस पर ढाई लाख रुपये काइनाम रखा गया है।
माफिया अतीक इतना शातिर दिमाग है कि वह सिस्टम को खरीद लेने और आतंक फैलाकर दबाने में यकीन रखता है. अतीक केखिलाफ तमाम बड़ी कार्रवाइयां करने वाले यूपी पुलिस के पूर्व आईजी रिटायर्ड आईपीएस अफसर लाल जी शुक्ल का साफ़ तौर परकहना है कि पुलिस और दूसरे महकमों के तमाम लोगों ने कभी अतीक को मोहरे की तरफ इस्तेमाल किया तो कभी उससे मिलने वालेउपहारों की लालच उसके इशारे पर नाचते रहे. सरकारी तंत्र की मिलीभगत और मेहरबानी के चलते ही उसने अरबों का साम्राज्य खड़ाकर लिया. गुनाहों की दुनिया का बेताज बादशाह बन गया और देश विधानसभा से लेकर देश की संसद में पहुंचकर माननीय बन गया. लाल जी शुक्ल के मुताबिक़ अपनी राह में रुकावट बनने वाले किसी भी शख्स को उसने नहीं छोड़ा. चांद बाबा से लेकर उमेश पाल तकसबका एक ही अंजाम कराया. उनका कहना है कि जिन लोगों पर अतीक जैसे खतरनाक माफिया पर शिकंजा कसने की ज़िम्मेदारी थी, वह उसका बचाव करते थे. सरकारी मशीनरी से लेकर सियासी पार्टियों ने ही उसे आज इस मकाम तक पहुंचा दिया है।
योगी राज में हुईं कई बड़ी कार्रवाइयां
योगीराज में अतीक और उसके गुर्गों के साथ ही तमाम करीबियों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाइयां की गई हैं. उसकी कमर तोड़ दी गई है, लेकिन गुनाह की दुनिया का खात्मा होना अभी पूरी तरह बाकी है। उमेश पाल शूट आउट केस के बाद जारी किये गए आंकड़ों केमुताबिक़ योगी राज में माफिया अतीक अहमद के गैंग पर कुल 144 कार्रवाइयां की गई हैं. गैंग से जुड़े हुए 14 लोगों की गिरफ्तारी हुईहै. 22 करीबियों की हिस्ट्रीशीट खोली गई है. 14 लोगों के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई है. 68 शस्त्र लाइसेंस रद्द किये गएहैं. दो लोगों को जिला बदर किया गया है. गैंगस्टर एक्ट के तहत 415 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है. 751 करोड़ रुपये की अवैधसम्पत्तियों का ध्वस्तीकरण किया गया है. इसके अलावा ठेके-टेंडर और दूसरे अवैध कामों पर 1200 करोड़ रुपये से ज़्यादा की चोट कीगई है।
अतीक अहमद को कुल मिलाकर 2368 करोड़ रुपये की आर्थिक चोट दी गई है। हालांकि जानकारों का दावा है किस दो अरब सेज़्यादा की आर्थिक चोट के बावजूद उसके साम्राज्य पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा है। उसके खिलाफ ईडी ने मनी लांड्रिंग का भी केसदर्ज किया है। काली कमाई को लेकर माफिया के कई करीबी ईडी की रडार पर हैं। तमाम मामलों में गैंग के कई सदस्यों की जमानतकोर्ट से निरस्त कराई जा रही है। शहर के लूकरगंज इलाके में अतीक के कब्ज़े से खाली कराई गई ज़मीन पर गरीबों के लिए बेहद कमकीमत पर फ़्लैट बनाए जा रहे हैं। हालांकि इन सारी कवायदों के बावजूद माफिया की दहशत की दुनिया का अभी पूरी तरह से खात्मानहीं हो सका है।
अतीक अहमद को मिट्टी में मिलाने का काम शुरू
दोस्तों योगी जी के ज़ुबान से अपने ये बात तो सुना ही होगा की माफ़ियाओ कोमिट्टी में मिला देंगे, ये बात सब साबित होती दिख रही हैं! आगे पड़े
वरिष्ठ पत्रकार रतिभान त्रिपाठी के मुताबिक अतीक जैसे सफेदपोश माफिया रसूखदार ज़रूर रहे हैं, लेकिन अगर सरकारों ने मजबूतइच्छाशक्ति दिखाई होती और अफसरान ईमानदारी से काम करते तो बाहुबली के तिलिस्म को तोड़ना कतई मुश्किल भी नहीं था। उनकादावा है कि सरकारी तंत्र अतीक अहमद के इशारों पर नाचता रहा है. माफिया का संरक्षण करता रहा है। सियासी उपयोगिता के चलतेही मायावती ने दो महीने पहले अतीक की पत्नी को प्रयागराज से अपनी पार्टी की तरफ से मेयर का उम्मीदवार बनाया था और अबखुलकर परिवार का बचाव कर रही हैं। हालांकि यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कभी अतीक के दबदबे वाली इलाहाबाद पश्चिमी सीट सेलगातार दूसरी बार विधायक चुने गए सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि माफिया के गुनाहों के ताबूत में अब आख़िरी कील ठोंकना हीबाकी है। सीएम योगी की मंशा के मुताबिक़ बाहुबली अतीक बहुत जल्द ही पूरी तरह मिट्टी में मिला दिया जाएगा. हालांकि अतीक केपरिवार का कहना है कि वह गुंडा -माफिया और बाहुबली नहीं बल्कि गरीबों और मजलूमों का रहनुमा है। वह अरसे से सियासी साजिशका शिकार होता रहा है। सियासी फायदे की वजह से ही उसका इनकाउंटर किया जा सकता था कहा जा सकता है कि सरकारी तंत्रऔर सियासी पार्टियों ने भले ही अतीक अहमद को ठिकाने लगाने के बजाय अपने फायदे की लालच में हमेशा उसे संरक्षण दिया हो, लेकिन अतीक जैसे माफियाओं को लेकर उस समाज को भी नये सिरे से सोचने की ज़रुरत है, जो उसे अपने रहनुमा के तौर पर चुनकरसंसद और विधानसभा भेजती रही है।
अतीक अहमद की सजा
दोस्तों आज की तारीख़ को याद रखें, जोकि हैं 28-03-2023 आज अतीक अहमद को उम्र कैद की सज़ा सुना दिया गया हैं।
Breaking news
कुछ दिन ही पहले मतलब 1 से दो दिन हो रहा होगा अतीक अहमद के बेटे को भी मार दिया एनकाउंटर कर दिया गया था।और अतीक अहमद को अपने बेटे के जनाजे तक में भी जाने का ऑर्डर नहीं दिया गया था। और अब ये खबर नीचे पढ़े।
अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ़ की गोली मारकर हत्या सरेआम।
अतीक अहमद को सबके सामने पुलिस के सामने तीन चार लोगों ने मिलकर गोली मारकर हत्या कर दी थी? अतीक अहमद को मारने वाले लोग हिंदू हैं। और जवान लड़के हैं, अतीक अहमद को मारने के बाद तीनों लड़कों ने पुलिस के सामने हाथ उठा दिया मतलब कि अपने आप को पुलिस के हवाले कर दिया। तीनों का नाम है,
पर अब अतीक अहमद और उसके भाई के मर्डर के बाद काफ़ी ज़्यादा राजनीति भी होने लगा है, अलग अलग बातें अलग तरीक़े का बयान भी दे रहे हैं, बड़े नैता लोग और इस मर्डर पर काफ़ी सारे सवाल भी उठ रहे हैं आख़िर कैसे सबके सामने कोई गोली मार सकता हैं।
बताया जा रहा था कि अतीक अहमद को मेडिकल टेस्ट के लिए लेकर जाया जा रहा था, फिर रास्ते में तीन चार लोगों ने सबके सामने अतीक अहमद को गोली मार कर हत्या कर दी। वहाँ पर पुलिस वाले भी थे और मीडिया वाले भी थे, और ये वीडियो काफ़ी ज़्यादा वायरल भी हो रहा है!
अतीक अहमद के मर्डर की ख़बर सुनने के बाद योगी सरकार ने तुरंत एक ख़ास बैठक बैठायी थी? अतीक अहमद की मृत्यु की तारीख़ 15 April 2023 की रात को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि उनको मेडिकल टेस्ट के लिए लेकर जाया जा रहा था पुलिस व्यवस्था भी उनके साथ थी पर वो नाकामयाब हुईं और तीन गुंडों ने अतीक अहमद को मार दिया और ख़ुद को पुलिस के हवाले कर दिया। अतीक अहमद और इसके भाई को मारने वाले लोगों का नाम हैं! TV9 Bharatvarsh न्यूज़ चैनल से हममें पता चला था, इस Breaking News के बारे में।
अलग अलग पार्टी के द्वारा बताया जा रहा है कि ये पुलिस UP पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी नाकामयाबी है, ये योगी सरकार को जवाब देना होगा इस मर्डर पर, पुलिस क्या कर रही थी पुलिस के सामने ये कांड कैसे हो सकता है। 3 लोग आते हैं मीडिया वाले भी सामने होते हैं और अतीक अहमद को गोलियों से भुनज देते हैं। और फिर गुंडे ख़ुद को पुलिस के हवाले कर देते हैं राजनीतिक होने लगा है अब इन पर, अतीक अहमद की गोली मार कर हत्या के बाद अब राजनीति की शुरुआत इससे पहले योगी जी ने भी बोला था की माफ़ियाओं को मिट्टी में मिला देंगे।
आज की इस लेख की मदद से हमने बताया अतीक अहमद के बारे में की ये कौन था, कैसे बना अतीक अहमद एक बहुत बड़ा अपराधी।और इसकी मौत कैसे हुई।
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